श्रीमद्भागवत कथा में भगवान कपिल और मां देवहूति के मध्य हुए संवाद का किया गया वर्णन

दैनिक बालजी एम एम मालवीय
बांगरमऊ, उन्नाव। नगर के मोहल्ला खत्रियाना स्थित महिला मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास भारत भूषण जी महराज ने भगवान कपिल और मां देवहूति के मध्य हुए संवाद का वर्णन कर श्रद्धालु भक्तों को भावविभोर कर दिया।उन्होंने उपदेश दिया कि श्री मद्भागवत मृत्यु के भय से मुक्त कर देती है।
कथा व्यास श्री भूषण जी महराज ने राजा परीक्षित और शुकदेव के बीच हुए प्रश्नोत्तर का वर्णन करते हुए बताया कि राजा परीक्षित ने गुरुदेव से पूछा कि जल्दी मरने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए। शुकदेव जी ने बताया कि जो भी जीवन की स्वासें हैं , उन प्रत्येक स्वास पर परमपिता परमात्मा का नाम स्मरण करना चाहिए। नाम धन जिनके पास है वहीं सबसे बड़े धनी है। उन्होंने कपिल और देवहूति के मध्य संवाद का वर्णन करते हुए बताया कि माता देवहूति ने पूछा कि बेटा मेरे पिता महाराज मनु बाबा स्वयं ब्रह्म जी और परबाबा स्वयं नारायण तथा मेरा बेटा स्वयं भगवान है। फिर भी मै सुखी नहीं हूं। प्रश्न किया कि मैं आखिर सुखी कैसे रहूं।कपिल भगवान कहते है मां यदि संसार में सुखी रहना है तो आप अपनी दृष्टि समान रखें और प्रत्येक मानव की आत्मा में परमात्मा का दर्शन करें। कथा के समापन पर यजमान अशोक रस्तोगी और उनकी धर्मपत्नी अलका रस्तोगी सहित अन्य सभी स्वजनों ने भगवान कृष्ण की आरती कर प्रसाद वितरित किया।





