“आज ढोल वृंद वादन की गूंज संग होगा दीपावली शिल्प मेले का आगाज“

मुख्य अतिथि होंगे प्रो. सत्यकाम, कुलपति, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय
प्रयागराज ०७ अक्टूबर
बीके यादव/बालजी दैनिक
त्योहारों का सीजन चल रहा है। हर कोई अपने घर को सजाने-संवारने की तैयारी में लगा है। ऐसे में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित 12 दिवसीय ‘दीपावली शिल्प मेला’ अपने चौथे संस्करण में एक बार फिर शिल्प, स्वाद और संगीत का अनूठा संगम लेकर आ रहा है।
मेले का शुभारंभ बुधवार, 8 अक्टूबर को केंद्र परिसर स्थित शिल्प हाट, प्रयागराज में मुख्य अतिथि प्रो. सत्यकाम, कुलपति, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज द्वारा शाम 5 बजे किया जाएगा। यह मेला 19 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात्रि 9 बजे तक चलेगा।
केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा ने बताया कि दीपावली शिल्प मेला का उद्देश्य हस्तशिल्प, कारीगरी और स्वदेशी उत्पादों को जनमानस से जोड़ते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सशक्त बनाना है।
देशभर से आएंगे शिल्प के रंग और स्वाद की महक
इस बार मेले में देश के विभिन्न राज्यों से कारीगर अपनी विशिष्ट कलाओं के साथ भाग ले रहे हैं। इनमें पश्चिम बंगाल का जूट वर्क, जयपुर की लाख की चूड़ियाँ, राजस्थान की क्रिस्टल पेंटिंग, रामपुर का पैच एवं ज़री वर्क, खुर्जा की सेरेमिक कप-प्लेट, तेलंगाना की पर्ल ज्वेलरी, जम्मू-कश्मीर का ड्राई फ्रूट और स्थानीय हस्तशिल्प उत्पाद विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इसके साथ ही अवधी और महाराष्ट्रीय व्यंजन भी स्वाद प्रेमियों को लुभाएंगे।
हर शाम गूंजेगी लोक संस्कृति की धुन
मेले में प्रतिदिन शाम 6 बजे से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। उद्घाटन दिवस पर कार्यक्रमों की शुरुआत कौशांबी के संतोष कुमार एवं साथियों की ‘प्रयाग ढोल वृंद वादन’ से होगी, वहीं सौदामिनी संस्कृत विद्यालय के बटुक मंत्रोच्चारण से शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा भजन गायक रत्नेश दुबे की भजन संध्या, मथुरा के मुरारी लाल तिवारी दल की ब्रज लोकनृत्य प्रस्तुति तथा प्रयागराज के अभिषेक सिंह एवं दल द्वारा प्रस्तुत ढेड़िया लोकनृत्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देंगे।
12 दिनों तक चलने वाला यह मेला न केवल खरीददारी का अवसर देगा, बल्कि देश की विविध लोकसंस्कृतियों, कलाओं और व्यंजनों का जीवंत उत्सव भी प्रस्तुत करेगा।





