नागवासुकी मंदिर से दशाश्वमेध मंदिर तक निकाली गयी भव्य कलश यात्रा

प्रयागराज :सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अन्तर्गत सोमवार को जनपद के चयनित शिवालयों में सामूहिक मंत्रोच्चार, ओमकार जाप, सोमनाथ संकल्प संवाद, प्रवचन सहित अन्य कार्यक्रमों का भव्य रूप से आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के गुजरात में सोमनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम का एवं मुख्यमंत्री के काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम का सजीव प्रसारण नागवासुकी मंदिर सहित नगर के प्रमुख मंदिरों में किया गया। महापौर उमेश चन्द्र गणेश केसरवानी सहित अन्य उपस्थित लोगो के द्वारा सजीव प्रसारण को देखा गया।सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अन्तर्गत पर नागवासुकी मंदिर से दशाश्वमेध मंदिर तक भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस यात्रा में 11 सदस्यीय यात्रियों के दल ने भाग लिया, जो सोमनाथ यात्रा से अभी हाल ही में वापस आए हैं। कलश यात्रा में महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी सहित सिविल डिफेंस उप नियंत्रक नीरज मिश्रा,सहायक उप नियंत्रक राकेश तिवारी, दुकानजी,आशीष बाजपेई, अलका सेठ,लक्ष्मी देवी,कैप्टन उमेशचन्द्र द्विवेदी,रमन कुमार, रंजीत सिंह, लोक कलाकार वेदानंद विश्वकर्मा अन्य यात्री सम्मिलित हुए। तहसीलों तथा शहर के चयनित मंदिरों में भव्य रूप से कार्यक्रम का आयोजन किया गया।तक्षक तीर्थ- दरिया बाद,मनोकामनापूर्ति प्राचीन मंदिर बहादुरगंज, दशाश्वमेध मंदिर, नागवासुकी मंदिर दारागंज,कोटेश्वर महादेव शिव कुटी,गंगोली शिवाला झूँसी, पड़िला महादेव,महर्षि दुर्वासा आश्रम ककरा दुबावल, मनकामेशवर तथा सोमेश्वर महादेव मंदिर में भजन, मंत्रोच्चार जाप व आरती का भव्य रूप से आयोजन सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर सिविल डिफेंस तीर्थराज पांडे, राकेश कुमार वर्मा,शशिकांत मिश्रा, डॉ रश्मि शुक्ला, विजय पटेल, संयोजक महानगर, भाजपा, हरिश्चन्द्र दुबे, प्रा० सहा० (संस्कृत),विकास यादव, वरिष्ठ सहायक, रोशन लाल, वरिष्ठ सहायक,अजय कुमार मौर्य, कनिष्ठ सहायक,शुभम कुमार (आ०सो०)सहित जिला स्काउट मास्टर फिरोज आलम खान एवं उनकी टीम ने कार्यक्रम को सफल एवं सकुशल सम्पन्न कराने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर सिविल डिफेंस प्रभात मौर्य, शैलेंद्र मिश्रा,संतोष कुशवाहा, संगीता सिंह,सरिता यादव, सेल्फी वर्मा,बच्चा पाठक,राजू श्रीवास्तव,सोनू निषाद, नितेश शुक्ला,सविता सिंह,सरिता यादव,राजेश पाठक,तीर्थराज पांडे,सुभाष वैश्य काशीनाथ सोनकर बड़ी संख्या में उपरोक्त सभी मंदिरों पर स्थानीय जनमानस की उपस्थिति रही।





