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हरियाणा की अर्थव्यवस्था बढ़ी, लेकिन वित्तीय मोर्चे पर बढ़ी चिंता; कर्ज में 10.52% का इजाफा

चंडीगढ़। तेजी से बढ़ती हरियाणा की अर्थव्यवस्था में घटता पूंजीगत खर्च और बढ़ता कर्ज वित्तीय प्रबंधन बिगाड़ सकता है। मंगलवार को विधानसभा में रखी गई भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य सकल घरेलू उत्पाद (एसडीजीपी) 11.83 प्रतिशत बढ़ा है। राजस्व प्राप्तियां भी 5.05 प्रतिशत बढ़ी हैं, लेकिन गैर कर राजस्व और केंद्र से अनुदान घटने से अर्थव्यवस्था पर दबाव है।

कैग रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय जीडीपी में राज्य की हिस्सेदारी 3.67 प्रतिशत रही है। पांच वर्षों में यह हिस्सेदारी अपेक्षाकृत स्थिर है। जीएसटी समेत कर संग्रह और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ने से राज्य की राजस्व प्राप्तियां बढ़ी हैं। कुल प्राप्तियों में राज्य के अपने कर राजस्व की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई रही।

हालांकि, गैर-कर राजस्व सात प्रतिशत घटा, जबकि केंद्र से मिलने वाले सहायता अनुदान में 17.6 प्रतिशत की कमी आई। कैग ने सबसे बड़ी चिंता राज्य के खर्च के ढांचे को लेकर जताई है। कुल व्यय का 88.94 प्रतिशत राजस्व व्यय रहा। प्रतिबद्ध लागत और सब्सिडी अकेले राजस्व व्यय का करीब 64 प्रतिशत, कुल व्यय का 57 प्रतिशत और राजस्व प्राप्तियों का लगभग 76 प्रतिशत रही।

इस भारी बोझ के बीच पूंजीगत व्यय बजटीय प्रविधान से कम रहा। पूंजीगत व्यय कुल उधारी का केवल 17.67 प्रतिशत रहा। कैग के मुताबिक इससे बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों में निवेश के लिए राजकोषीय गुंजाइश सीमित होती है। हरियाणा राज्य राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम में तय राजस्व घाटे के लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सका।

राज्य की कुल देयताएं पांच वर्षों में लगातार बढ़ीं। एक साल में 10.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बढ़ती देनदारियों से भविष्य में मूलधन और ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ेगा तथा सरकार की वित्तीय लचीलापन क्षमता प्रभावित हो सकती है। सरकारी निवेश से मिलने वाला रिटर्न भी सरकार की उधारी पर औसत ब्याज दर से कम रहा।

कैग ने लघु शीर्ष 800 अन्य प्राप्तियां/व्यय के अत्यधिक इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। इससे लेन-देन की वास्तविक प्रकृति और उपयोग स्पष्ट होने में कठिनाई आती है तथा वित्तीय रिपोर्टिंग की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं की धनराशि की निगरानी के लिए सिंगल नोडल एजेंसी (एसएनए) और एसएनए-स्पर्श के इस्तेमाल को कैग ने सकारात्मक कदम माना है। हालांकि एसएनए-स्पर्श में पूर्ण माइग्रेशन अभी लंबित है।

2491 करोड़ की देनदारियां लंबित

प्रदेश पर 2491.65 करोड़ रुपये की देनदारियां लंबित हैं। यह एसजीडीपी का करीब 0.21 प्रतिशत और राजकोषीय घाटे का 7.19 प्रतिशत है। इनमें स्थानीय निकायों को वित्त आयोग के 1170.27 करोड़ के अनुदानों का लंबित अंतरण, 827.54 करोड़ के लंबित रिफंड, विभागों के खिलाफ डिस्काम की 253.82 करोड़ की ऊर्जा देनदारी और ऋण स्टॉक में शामिल नहीं किए गए 146.53 करोड़ रुपये के बजट से बाहर के उधार शामिल हैं।

इसके अलावा एनपीएस/सांविधिक निधियों में राज्य अंशदान तथा राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट से जुड़े 93.49 करोड़ की कमी, न हुई या ब्याज संबंधी देनदारियां भी शामिल हैं। कैग ने इनकी समयबद्ध पहचान, लेखांकन और रिपोर्टिंग पर जोर दिया है।

2135 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित

2024-25 में 2,135 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित थे, जिनमें 884 वर्ष 2019-20 से भी पहले के हैं। 40 स्वायत्त निकायों के 82 लेखे भी 30 सितंबर 2025 तक लंबित थे। 19 अनुदानों के राजस्व एवं पूंजीगत, भारित और दत्तमत खंडों में बड़ी बचत दर्ज हुई।

इस दौरान प्राधिकरण से अधिक कोई अतिरिक्त व्यय नहीं हुआ। हालांकि 2023-24 से संबंधित 1335.24 करोड़ का अतिरिक्त व्यय विधानसभा से नियमितीकरण के लिए अब भी लंबित है। वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठे हैं।

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