इसरो और डीआरडीओ ने भारत को अभेद्य सुरक्षा चक्र दिया – प्रो. प्रशांत कुमार घोष

राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सेना का सशक्त होना नितांत आवश्यक- प्रो. आशुतोष सिन्हा
बलराम मौर्य/ बालजी हिन्दी दैनिक
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वाविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग में सशक्त सुरक्षा एवं सुरक्षित राष्ट्र विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह के निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता इलाहाबाद केंद्रीय विश्वाविद्यालय, प्रयागराज के अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रशांत कुमार घोष रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कला एवं मानविकी संकायध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. आशुतोष सिन्हा नें किया। प्रो. प्रशांत कुमार घोष नें अपने उद्बोधन में कहा कि महान भारतीय नीतिकार कौटिल्य ने अपनी पुस्तक “ अर्थशास्त्र “ में राष्ट्रीय सुरक्षा को देश के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक शक्ति का मूल आधार बताया है। भारत की वर्तमान जटिल भौगोलिक-राजनीतिक स्थिति , विशेषकर चीन, पाकिस्तान तथा बांग्लादेश के बढ़ते हुए गठजोड़ को देखते हुए , आज राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा देश के लिए पहली प्राथमिकता है । आज भारतीय सेना दुनिया की श्रेष्ठ सेना है। आज भारत न केवल विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, बल्कि हाल ही में प्रकाशित ग्लोबल पॉवर इंडेक्स 2025 में सामरिक शक्ति के आधार पर भारत को अमेरिका, रूस तथा चीन के बाद चौथे स्थान पर रखा गया है। पिछले दस वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र को आधुनिक तथा आत्मनिर्भर बनाने में सार्वजनिक एवं निजी, दोनों क्षेत्रों की उत्पादन इकाइयों ने बड़ी छलाँग लगायी है।इस अवधि में रक्षा उत्पादन में तीन गुने से अधिक की तथा रक्षा निर्यात में बारह गुने से अधिक की वृद्धि हुई है। आज भारत सौ से अधिक देशों को रक्षा उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए देश के दो राज्यों- उत्तर प्रदेश तथा तमिलनाडु में रक्षा उद्योग गलियारे विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल में ही लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल उत्पादन की एक इकाई प्रारम्भ की गई है। भारत की दो प्रमुख संस्था डीआरडीओ तथा इसरो ने अपने अभिनव योगदान से भारतीय सुरक्षा कवच को मज़बूत बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभायी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ए आई तथा सॅटॅलाइट निर्देशित ब्रह्मोस तथा आकाश मिसाइलों के सटीक प्रहार और बचाव प्रदर्शन से भारत ने दुनिया को अपनी सैन्य शक्ति का लोहा मनवाया है । अंतरिक्ष शक्ति में विस्तार के साथ ही सेना के तीनों अंगों के लिए निरंतर नए स्वदेशी अस्त्र-शस्त्रों के अनुसंधान और विकास द्वारा भारत बड़ी तेज़ी से सशक्त तथा आत्मनिर्भर सेना की ओर बढ़ रहा है । प्रो. आशुतोष सिन्हा ने अध्यक्षीय उद्बोधन मे कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सेना का सशक्त होना नितांत आवश्यक है। उन्होंने बताया की ऑपरेशन सिन्दूर की सफलता ये साबित करती है। हमारी सेना शौर्य के साथ साथ तकनीक में भी किसी से पीछे नहीं है। हमें उसपर गर्व होना चाहिए। प्रो. सिन्हा बताया कि आर्थिक विकास एवं समृद्धि के लिए राष्ट्र की सुरक्षा पहली आवश्यकता है। अतिथियों का स्वागत प्रो आशुतोष सिन्हा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. प्रिया कुमारी नें किया। इस अवसर पर प्रो. मृदुला मिश्रा, जैव रसायन विभाग के अध्यक्ष प्रो. फर्रुख जमाल, प्रो. विनोद श्रीवास्तव, डॉ. अलका श्रीवास्तव, डॉ. सरिता द्विवेदी, डॉ. अखंड सिंह, डॉ संजीव श्रीवास्तव, डॉ. श्याम बहादुर, विजय शुक्ला, कुशाग्र पाण्डेय एवं बड़ी संख्या में छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहे।





