सारनाथ से थाईलैंड के भिक्षु संघ के सानिध्य में दो दिवसीय “अरण्य(वन) साधना” से शामिल हुए उपासक संघ

सारनाथ स्तूप के समक्ष हुआ”धम्मचक्रप्रवर्तन सुत्त” का संगायन
बालजी दैनिक
प्रतापगढ। जनपद के बौद्ध उपासकों द्वारा विश्व शांति व लोक कल्याण हेतु पावन श्रावण मास में 12 जुलाई को लगभग 40 सदस्यों के उपासक/उपासिकाओ का संघ सारनाथ में वर्षावास कर रहें थाईलैंड के उच्च अवस्था प्राप्त पावन भिक्षु संघ के सानिध्य में दो दिवसीय “अरण्य(वन) साधना” में प्रतिभाग किया साथ ही आषाढ़ी गुरू पूर्णिमा का मानव जगत व बौद्ध आध्यात्मिक जगत में जहाँ छब्बीस सौ साल पहले बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद सारनाथ के ऋषिपत्तन मृगदाव वन में पञ्चवर्गीय भिक्खुओं कौण्डिन्य, वप्प,भद्दीय,अस्सजि और महानाम को अपना पहला ऐतिहासिक धम्म उपदेश दिया था उसी पावन स्थल “धम्मेक स्तूप” के समक्ष पावन भिक्षुसंघ व आचार्य राजेश चंद्रा के सानिध्य मे “धम्मचक्रप्रवर्तन सुत्त” का संगायन(पाठ)कर विश्व शांति व लोक कल्याण की कामना की और धम्मा लर्निंग सेंटर के विहाराधिपति पूज्य भंते चंदिमा महाथेरो जी से आशीर्वाद भी प्राप्त किया। इस धम्मयात्रा में राकेश कनौजिया, अवधेश प्रसाद,मनीष रंजन,बहन लीलावती, विजय शंकर कनौजिया,राजीव कुमार,गया प्रसाद स्वावलंबी, दिनेश कुमार, आचार्य उमेश, अशोक मौर्य, जितेंद्र यादव, मधुसूदन गोपाल, अभिषेक मौर्य, आरती देवी,सुनीता कनौजिया, विजय सरोज,अशोक कुमार व संतोष सरोज, कमल किशोर, शिव प्रसाद व जागेश्वर प्रसाद आदि साधको ने प्रतिभाग किया।





