
रायपुर: मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के बीच मतभेद की बात सामने आई है. इसके अलावा निर्वाचन आयोग के तीन सदस्यों में से दो चुनाव आयुक्त द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखित आपत्तियां दर्ज करने के मामले पर किसी तरह की सुनवाई नहीं होने के मामले पर छत्तीसगढ़ में भी राजनीति गर्म हो गई है. भाजपा ने इसे नीतिगत तरीके से गलत लोगों के नाम के काटने की प्रक्रिया बताया, जबकि कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा है कि ज्ञानेश कुमार पीएम मोदी और भाजपा के लिए कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री साय ने कहा- यह सतत प्रक्रिया
इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अगर मतदाता सूची में बदलाव किया जा रहा है और उसमें से गलत लोगों का नाम काटा जा रहा है तो इसमें किसी तरह की बुराई नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी पुनरीक्षण का कार्य किया जा रहा है उससे मतदाता सूची में सुधार का काम होगा और यह सतत चलने वाली प्रक्रिया है. इस चीज को लेकर निर्वाचन आयोग समय-समय पर काम करते रहता है इसमें किसी तरह की कोई दिक्कत वाली बात नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और उसके लिए बनने वाले नीति का जो भी निर्णय होता है वह सर्वसम्मति से ही लिया जाता है.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इसमें किसी तरह की ऐसी चीज नहीं होती है जो मतभेद या विभेद के तहत देखी जा सके. जो भी निर्णय मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए लिया गया है वह सभी चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिया है. इसमें किसी तरह के किसी विवाद या विभेद की बात नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें भी कोई दो राय नहीं है की जो भी निर्णय हुआ होगा वह सर्वसम्मति से ही लिया गया होगा.
कांग्रेस की आदत है वह चीजों को दूसरे तरह से ही देखते हैं. अगर मतदाता सूची में सुधार किया जा रहा है तो इसमें किसी तरह की कोई परेशानी की बात नहीं है. निर्वाचन आयोग इस तरह के सुधार को करते रहता है.– मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
अरुण साव बोले- कांग्रेस में भी हुआ SIR
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि, SIR को लेकर किसी भी प्रकार से भ्रम में रहने की जरूरत नहीं है. यह प्रक्रिया के अधीन किया गया है. देश में पहली बार सर्वे नहीं हुआ है. कांग्रेस के सरकारों के समय में भी किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर विचार कर निर्णय कर दिया है. कांग्रेस बिना मतलब के बखेड़ा खड़ा कर रही है.
कांग्रेस ने कहा- ज्ञानेश कुमार कठपुतली हैं
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की टिप्पणियों से साफ हो गया है कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद के दायित्वों का निर्वहन निष्पक्ष रूप से नहीं कर रहे है. उन्होंने SIR में मतदाताओं का नाम दोषपूर्ण तरीके से कटवाया, उनके निर्देशन में किया गया SIR दोषपूर्ण है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंद्रह महीने से भी पहले वोट चोरी का मुद्दा उठाया था. आज उनकी बात पहले से भी सही साबित हुई है.
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री के इशारे पर काम करने वाली कठपुतली की भूमिका निभाई है. गृह मंत्री खुद प्रधानमंत्री की इच्छाओं को पूरा करने के लिए नियुक्त हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR में मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने में 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां व्यक्त की. लेकिन उनको नजरअंदाज कर दिया गया.
यह सारे तथ्य आयोग के रिकॉर्ड में है. जबकि आयोग का काम बहुमत के आधार पर चलता है. ऐसे में दो आयुक्तों की आपत्तियां दरकिनार किया जाना, बताता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपनी मनमानी चला रहे है. सीईसी जो कुछ कर रहे हैं, वह प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की पूरी जानकारी और समर्थन से हो रहा है.- सुशील आनंद शुक्ला
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ने अपने संवैधानिक पद की गरिमा को पूरी तरह धूमिल कर दिया है. उनकी नीयत की ईमानदारी, निष्पक्षता और स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता हमेशा से ही बेहद संदिग्ध रही है.
24 अप्रैल 2026 को विपक्ष के 73 सांसदों ने उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था, जो अब भी लंबित है. इस बीच, आज उनके अपने ही दो सहयोगियों ने उन्हें पूरी तरह एक्सपोज कर दिया है. इसमें कोई संदेह नहीं कि यदि संसद का विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो दोनों सदनों में विपक्षी सांसद उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पेश करेंगे.

