उत्तर प्रदेशबरेली

पीडब्ल्यूडी में रिंगरोड, फोरलेन भूमि घोटाले में फंसे रिटायर्ड एक्सईन, एई, जेई की जांच में हाईकोर्ट से राहत

चीफ इं ने शासन को भेजी रिपोर्ट

बरेली-सितारगंज फोरलेन और रिंग रोड निर्माण के भूमि घोटाले में फंसे पीडब्ल्यूडी के एई और सेवानिवृत्त अधिशासी
अभियंता की जांच पूरी हो गई है। चीफ इंजीनियर ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। बरेली-सितारगंज फोरलेन और रिंग रोड की अधिग्रहीत जमीन पर बने ढांचों के मूल्यांकन में
गड़बड़ी मिली थी। इसके लिए एक सेवानिवृत्त इंजीनियर समेत लोनिवि के चार इंजीनियरों को दोषी माना गया था। शासन के
आदेश पर सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, जेई राकेश
कुमार और अंकित सक्सेना को निलंबित कर दिया गया था। इसके लिए रिटायर्ड अधिशासी अभियंता नारायण सिंह को भी
जिम्मेदार माना गया था। हालांकि जेई राकेश कुमार और अंकित सक्सेना को हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी।

क्या था पूरा घोटाला

बरेली में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के मूल्यांकन घोटाले में फंसे पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं को आरोपपत्र जारी किए जाने के बाद विस्तृत जांच चल रही है। मुख्य अभियंता अजय कुमार अब व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देते हुए जांच को अंतिम रूप दे रहे हैं। जांच आख्या जुलाई में शासन को भेजी जा सकती है।

बरेली-सितारगंज और बरेली रिंग रोड के लिए मुआवजा तय करते समय हेराफेरी की गई थी। एनएचएआई की ओर से नियुक्त निजी एजेंसी ने जमीन और परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के बदले मुआवजा अधिक तय किया गया था। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने इसका सत्यापन कर दिया था। जब जांच हुई तो संबंधित एजेंसी, एनएचएआई के तत्कालीन अधिकारियों और लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन अभियंता जिम्मेदार पाए गए।
सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, जेई राकेश कुमार, अंकित सक्सेना, सुरेंद्र सिंह और विभागीय अमीन शिवशंकर के नाम आरोपपत्र जारी हुए थे। जांच की जिम्मेदारी नवंबर 2024 में मुख्य अभियंता अजय कुमार को सौंपी गई है। छह महीने में जांच पूरी होनी है। मुख्य अभियंता को सभी ने जवाब दाखिल कर दिए हैं। अब मुख्य अभियंता ने व्यक्तिगत सुनवाई के लिए पत्र जारी किया है।

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