बरेली विकास प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम द्वारा निम्नलिखित अवैध निर्माणों के विरूद्ध सीलिंग की कार्यवाही की गयी

बरेली । उ0प्र0 नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की सुंसगत धाराओं के अन्तर्गत प्राधिकरण के अवर अभियन्तागण संदीप कुमार, अजीत साहनी, सीताराम, सुरेन्द्र द्विवेदी एवं सहायक अभियन्तागण श्री धर्मवीर सिंह, गजेन्द्र कुमार शर्मा, विशेष कार्याधिकारी श्री अजीत कुमार सिंह एवं प्रवर्तन टीम की उपस्थिति में निम्नलिखित अवैध निर्माणों के विरूद्व सीलिंग की कार्यवाही की गयी।
कय्यूम खॉ उर्फ मुन्ना द्वारा थाना प्रेमनगर मोहल्ला कोहाड़ापीर पुल के नीचे लगभग 40 वर्गमी0 में व्यवसायिक शोरूम का संचालन किया जा रहा था, जिसके विरूद्ध प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम द्वारा सीलिंग की कार्यवाही की गयी।
वाजिद बेग द्वारा थाना इज्जतनगर मोहल्ला फरीदापुर चौधरी में लगभग 1200 वर्गमी0 में बारात घर का संचालन किया जा रहा था, जिसके विरूद्ध प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम द्वारा सीलिंग की कार्यवाही की गयी।
नाजिर खॉ द्वारा वीर सावरकर नगर 100 फिटा रोड पर लगभग 300 वर्गमी0 में गैराज का संचालन किया जा रहा था, जिसके विरूद्ध प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम द्वारा सीलिंग की कार्यवाही की गयी।
जाकिर प्रधान द्वारा थाना कैन्ट ग्राम मोहनपुर ठिरिया में लगभग 300 वर्गमी0 में टीन शेड डालकर जिम का संचालन किया जा रहा था, जिसके विरूद्ध प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम द्वारा सीलिंग की कार्यवाही की गयी। इरफान द्वारा थाना कैन्ट ग्राम मोहनपुर ठिरिया में लगभग 500 वर्गमी0 में वर्कशाप का संचालन किया जा रहा था, जिसके विरूद्ध प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम द्वारा सीलिंग की कार्यवाही की गयी।
उ0प्र0 नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 के प्राविधानों के अन्तर्गत किसी भी व्यक्ति द्वारा निर्माण/प्लाटिंग करने से पूर्व बरेली विकास प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराना अनिवार्य है। बिना मानचित्र स्वीकृत कराये प्लाटिंग करना या भवन निर्माण करना पूरी तरह से अवैध है। बिना मानचित्र स्वीकृत कराये किये गये विकास/निर्माण का ध्वस्तीकरण प्राधिकरण द्वारा किया जा सकता है इसके लिए भवन/भूखण्ड के क्रेताओं को सलाह दी जाती है कि भविष्य में किसी भी परेशानी से बचने के लिए भवन/भूखण्ड क्रय करने से पूर्व उसकी मानचित्र स्वीकृति सम्बन्धी जानकारी प्राधिकरण से अवश्य प्राप्त कर लें तथा मानचित्र स्वीकृत न होने की स्थिति में खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। अन्यथा की दशा में प्राधिकरण द्वारा उ0प्र0 नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रभावी कार्यवाही की जायेगी, जिसका समस्त उत्तरदायित्व निर्माणकर्ताओं का स्वयं का होगा।





