अयोध्या के नजरबाग गुरुद्वारा में हुआ 19 वॉ महान गुरुमत का भव्य समागम

अयोध्या धाम के नज़रबाग गुरुद्वारे में भव्यता के साथ मनाया गया बंदी छोड़ दिवस, हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में गूंजे “जो बोले सो निहाल” के जयकारे
दीपों और रोशनियों से जगमगाया नज़रबाग गुरुद्वारा परिसर, 25 से 30 हजार श्रद्धालुओं ने लंगर में ग्रहण किया प्रसाद
गुरु हरगोबिंद साहिब जी की ऐतिहासिक रिहाई की स्मृति में हुआ भव्य आयोजन
परमजीत कौर / बालजी हिन्दी दैनिक
अयोध्या धाम l मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में स्थित नज़रबाग गुरुद्वारे में बुधवार को बंदी छोड़ दिवस बड़े ही उत्साह, श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। जैसे ही सूर्यास्त हुआ, पूरा गुरुद्वारा परिसर दीपों और रंगीन लाइटों से आलोकित हो उठा। श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी विशाल थी कि गुरुद्वारा प्रांगण से लेकर आसपास की गलियों तक “वाहेगुरु” के नाम की गूंज सुनाई दे रही थी। सुबह कीर्तन दरबार और अरदास से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथियों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर सेवा और सद्भाव का संदेश दिया। इसके बाद संगत द्वारा नगर कीर्तन निकाला गया, जिसमें पंज प्यारे की अगुवाई में सिख समाज के श्रद्धालु झंडे लेकर निकले। जगह-जगह पुष्प वर्षा और स्वागत द्वारों से उनका अभिनंदन किया गया। बंदी छोड़ दिवस सिख धर्म के लिए ऐतिहासिक महत्व है जो इतिहास के स्वर्णिम युग की शुरुआत थी l जो ऐतिहासिकता के संयोजन के साथ का एक अत्यंत प्रेरणादायक पर्व है। यह दिवस उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है जब सिखों के छठे गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी को ग्वालियर की जेल से 52 हिंदू राजाओं के साथ रिहा किया गया था। उन्होंने स्वयं तब तक जेल से बाहर आने से इनकार कर दिया जब तक सभी कैद राजाओं को स्वतंत्रता नहीं मिल गई। अंततः उनकी करुणा और न्यायप्रियता के परिणामस्वरूप 52 राजाओं की रिहाई संभव हुई, और उस दिन को ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाने की परंपरा प्रारंभ हुई। सिख परंपरा के अनुसार, जब गुरु हरगोबिंद साहिब जी ग्वालियर किले से बाहर निकले, उसी दिन दीपों का पर्व मनाया गया — यहीं से सिखों की ‘दीपावली’ या ‘प्रकाश पर्व’ की शुरुआत हुई। साथ ही गुरु गोविंद सिंह जी का 350 शहिदी दिवस को भी धूम धाम से मनाया गया l नज़रबाग गुरुद्वारे में इस शुभ अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रसाद लंगर सुबह से देर रात तक चलता रहा। प्रसाद लंगर में सिख समुदाय के भक्ति और सेवा का संगम चरमोत्कर्ष पर रहा l गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अनुसार सेवादारों के अनुसार लगभग 25 से 30 हजार श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक लंगर प्रसाद ग्रहण किया। सेवा में स्थानीय युवाओं और महिला श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। गुरुद्वारा परिसर में बच्चों ने ‘गुरु के जीवन से प्रेरणा’ विषय पर विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किया। वहीं, रात्रि में आयोजित दीवान सभा में प्रसिद्ध रागी जत्थों ने मधुर कीर्तन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्ति और भावनाओं से भर दिया। बंदी छोड़ दिवस के इस पर्व के आयोजन में सिख समाज के अलावा अन्य धर्मों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने मिलकर प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रमुख बाबा महिंदर सिंह ने कहा कि बंदी छोड़ दिवस केवल सिख इतिहास की गौरवगाथा नहीं, बल्कि यह मानवता, स्वतंत्रता और न्याय के लिए संघर्ष का प्रतीक है। बंदी छोड़ दिवस का यह पर्व अयोध्या जैसे पवित्र धाम में मनाया जाना अपने आप में अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। दीपों की जगमगाहट, श्रद्धा की उमंग और सेवा की भावना से सराबोर यह आयोजन न केवल सिख समाज के लिए बल्कि समूचे मानव समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। नज़रबाग गुरुद्वारा इन दिनों श्रद्धा, प्रकाश और भक्ति का केंद्र बना हुआ है , जहां हर चेहरे पर गुरु के प्रति आस्था और प्रेम झलक रहा है। 19 वॉ महान गुरुमत समागम भव्य तरीके से हुआ l साहिब के उपरांत आरती, अरदास, हुक्मनाम के बाद कीर्तन का आयोजन हुआ l सहयोग के लिए कानपुर, उन्नाव, नवाबगंज , लखनऊ , बाराबंकी, सोहावल , प्रतापगढ़ , अमेठी , सुल्तानपुर, टांडा, नौतनवा , गोरखपुर, खलीलाबाद, मुंडेरवा, बस्ती, नौगढ़ , बांसी , बढ़नी, बभनान , बहराइच , बलरामपुर, कर्नलगंज, विशेश्वरगंज, करनैलगंज, गोंडा, उतरौला , मसकनवा मनकापुर, नवाबगंज आदि ने सहयोग किया l इस अवसर पर अमर शहीद संत बाबा राम सिंह नानकसर सिंघडा करनाल वाले, संत बाबा त्रिलोचन सिंह जी नानकसर सिंघडा, अमर शहीद संत बाबा जंग सिंह नानकसर करनाल वाले, मुख्य प्रबंधक संत बाबा महिंदर सिंह , भाई इंदरजीत सिंह सादक अमृतसर वाले, भाई परमजीत नौतनवा वाले के साथ हजारों की संख्या संत , भक्त और श्रद्वालु मौजूद रहे l





