राज्यहरियाणा

भाजपा और कांग्रेस की तिकड़म: राज्यसभा की दूसरी सीट पर सियासी दांव

चंडीगढ़। हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव में अपने प्रत्याशियों की जीत पक्की करने के लिए भाजपा और कांग्रेस ‘तिकड़म’ में जुट गई हैं। एक सीट पर भाजपा के संजय भाटिया की जीत पक्की है, जबकि दूसरी सीट को अपना मानकर चल रही कांग्रेस के सामने भाजपा ने सतीश नांदल को निर्दलीय उतारकर नए समीकरण बना दिए हैं। अतीत के अनुभवों को देखते हुए सेंधमारी से बचने के लिए कांग्रेस ने विधायकों को दूसरे राज्य में शिफ्ट करने की तैयारी कर ली है।

राज्यसभा की दूसरी सीट पर निर्दलीय को जिताने का पूरा दारोमदार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल पर टिका है। नांदल को राज्यसभा पहुंचाने के लिए रणनीति बनाने को लेकर भाजपा नेताओं ने शीर्ष स्तर पर बैठकें शुरू कर दी हैं। इसी बीच कांग्रेस प्रत्याशी कर्मवीर बौद्ध ने शनिवार को नई दिल्ली जाकर पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा से आशीर्वाद भी लिया। साथ ही सांसद दीपेंद्र हुड्डा से मुलाकात कर चुनावों को लेकर चर्चा की।

मुलाकात के बाद हुड्डा ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि चुनाव में कांग्रेस की जीत तय है। आंकड़ों के मुताबिक एक सीट भाजपा के खाते में जाएगी और दूसरी कांग्रेस जीतेगी। भाजपा ने अपने दो उम्मीदवार चुनाव में उतारे हैं। ऐसे में भाजपा को तय करना है कि वह अपने दो उम्मीदवारों में से किसे जितवाना चाहती है। क्योंकि आंकड़ों के मुताबिक उसके खाते में सिर्फ एक ही सीट जाएगी और दूसरी सीट पर कांग्रेस अपनी सीट सुनिश्चित करेगी।

वहीं, कर्मवीर सिंह बौद्ध ने कहा कि मैं सभी नेताओं से लगातार मुलाकात कर रहा हूं। इसी कड़ी में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र कर्मवीर बौद्ध ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से लिया आशीर्वादहुड्डा से मुलाकात की है। सभी नेताओं का आशीर्वाद मेरे ऊपर है। मैं जरूर चुनाव जीतूंगा। निर्दलीय उम्मीदवार को लेकर कहा कि यह लोग हमेशा से वोट चोरी करते आए हैं। उनकी कोशिश नाकाम होगी।

इनेलो किसके पाले में जाएगा, संसदीय मामलों की समिति करेगी फैसला

इनेलो के दो विधायक हैं। अतीत को देखें तो राज्यसभा चुनावों में इनेलो अधिकतर भाजपा के साथ ही गया है। भाजपा के समर्थन से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे सतीश नांदल भी इनेलो में रहकर दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। पार्टी चुनाव में क्या रुख करती है, इसका निर्णय संसदीय मामलों की समिति की बैठक में किया जाएगा।

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