राज्यसभा टिकट कटने से रवनीत बिट्टू को झटका, भगवंत मान का दावा हुआ सही?

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का वह दावा चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जल्द ही सांसद नहीं रहेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा जारी नई राज्यसभा उम्मीदवार सूची में बिट्टू का नाम शामिल नहीं किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मुख्यमंत्री मान ने हाल ही में सोशल मीडिया पर दावा किया था कि बिट्टू न केवल सांसद पद खो सकते हैं, बल्कि भविष्य में केंद्रीय मंत्री पद से भी बाहर हो सकते हैं। भाजपा की राज्यसभा सूची में उनका नाम न होने से मान का पहला दावा सही साबित होता दिखाई दे रहा है। अब राजनीतिक नजरें संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल पर टिकी हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू वर्ष 2024 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। उन्हें पंजाब में भाजपा के प्रमुख सिख चेहरों में गिना जाता है और पार्टी राज्य में उनके जरिए अपना जनाधार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही थी।
राज्यसभा से बाहर रखने के फैसले ने पंजाब में भाजपा की सिख राजनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व ने पंजाब को लेकर संतुलित रणनीति अपनाने का प्रयास किया है। एक ओर भाजपा ने वरिष्ठ सिख नेता केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर संगठन में उनकी भूमिका मजबूत की है, वहीं दूसरी ओर बिट्टू को राज्यसभा सूची से बाहर रखा गया है।
कुछ समय पहले तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पंजाब से जुड़े कार्यक्रमों में बिट्टू को प्रमुखता से देखा जाता था। हालांकि प्रदेश संगठन में हुए हालिया बदलावों के बाद राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
राज्यसभा टिकट न मिलने के बावजूद रवनीत सिंह बिट्टू ने संकेत दिए हैं कि वह वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। इसे उनकी राष्ट्रीय राजनीति से राज्य की जमीनी राजनीति की ओर वापसी के रूप में देखा जा रहा है।
बिट्टू का राजनीतिक सफर हाल के वर्षों में कांग्रेस नेतृत्व के साथ विवादों को लेकर भी चर्चा में रहा है। कांग्रेस छोड़ने के बाद उनके और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। इस विवाद ने राष्ट्रीय राजनीति में भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के इस फैसले से पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। वहीं आने वाले दिनों में केंद्रीय मंत्रिमंडल और पंजाब भाजपा संगठन में होने वाले संभावित बदलावों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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